
मित्रों, सावधान!
क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा दिया गया पैसा जिसे आप किसी की जरूरत समझकर देते हो वह उस व्यक्ति की मदद कर भी रहा है या नहीं?
मित्रों हमारे देश भारत में भिखारी बनकर सड़क पार भीख मांगना व्यक्ति की मजबूरी नहीं एक गैंग द्वारा सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा व्यवसाय है, मित्रों ये गैंग देश भर से लोगों को किडनैप करते हैं उनके हाथ पैर तोड़ देते हैं, उन्हें महीनों तक भूखा रखते है मात्र उतना ही खाने को देते है जिससे वो इंसान जीवित रह सके, उन्हें बेरहमी से मारते पीटते है, उन्हें घातक नशे का आदी बनाते है, उन्हें घातक इंजेक्शन और दवाएं देते है जिससे वे हमेशा नशे में रहे और लोगों को उनकी अवस्था और हालत देख कर दया आए और उन व्यक्तियों को अधिक से अधिक रुपया भिक्षा के रूप में मिल सके,

सुरेश मांझी(झारखंड)
मित्रों इन गैंग ने अपना क्षेत्र,मंदिर ,मस्जिद और बाजारें बांट रखी है जहां पर ये गैंग अपने सदस्यों द्वारा प्रतिदिन लोगों से भिक्षा मंगवाने का कार्य करते हैं।गैंग ने काम करने वाले इन भिखारियों को प्रतिदिन स्लीपिंग पिल्स और भयानक दवाएं और नशे की सामग्री दी जाती है|
यह एक अत्यधिक संगठित अपराधिक नेटवर्क है ।देश में चार लाख से अधिक भिखारी है जिसमें से 21% ,12वीं पास है, 3000 से अधिक भिखारी है जो डिप्लोमा या डिग्री होल्डर है,एक भिखारी दिन भर में इतने पैसे कमाता है कि आप सोच कर हैरान हो जाएंगे।

आज हम आपसे एक सच्ची घटना साझा करेंगे , यह घटना घटी एक सुरेश नाम के व्यक्ति के साथ जो झारखंड से कानपुर उत्तरप्रदेश नौकरी की तलाश में आया था , वह एक स्लम इलाके में रहने लगा जहां उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई उस व्यक्ति ने नौकरी देने के बहाने उसे एक सुनसान स्थान पर बुलाया और उसे किडनैप कर लिया , सुरेश बताता है कि उसके बाद उसके साथ हैवानियत शुरू होती है, उसे प्रतिदिन इंजेक्शन दिए जाते है , उसकी आंखों में केमिकल डाल दिया जाता है जिससे सुरेश अंधा हो गया, उसकी दोनों हाथों की सभी अंगुलियों को काट दिया जाता है,और शरीर पर गहरे घाव दिए जाते थे, यह सब सिर्फ इसलिए किया जाता था क्योंकि वह एक भिखारी बन जाए और लोगों को सुरेश को देख कर दया आए।कुछ दिन सुरेश को एक महिला के हाथों 70,000 रुपए में बेंच दिया जाता है, और एक राज नाम का आदमी उसे दिल्ली लेकर जाता है, दिल्ली में उसे भीख मांगने के लिए एक जगह पर छोड़ दिया जाता है, सुरेश और इसके सभी साथी भिखारी को सिर्फ 2 रोटी ही प्रतिदिन खाने को दी जाती थी जिससे वह मात्र जिंदा रह सके , दया का पात्र दिख सके और अच्छी कमाई कर सके, पर सुरेश की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जाती है और उसे वापस कानपुर भेज दिया जाता है , कानपुर में भी सुरेश से भीख मंगवाया जाता है ,पर सुरेश कानपुर आकर मरने की कगार पर पहुंच जाता है तो उसे गैंग द्वारा एक सुनसान जगह पर छोड़ दिया जाता है,
जैसे तैसे सुरेश लोगो की मदद से अपने घर वापस झारखंड जा पाता है पर उसके परिवार वाले ही सुरेश को पहचानने से इनकार कर देते हैं
सुरेश के स्थानीय विधायक ने सुरेश की मदद की और प्राथमिकी दर्ज करवाई।
Economic Times में छपे एक लेख के अनुसार भारत में भिखारी माफिया 1.5 लाख करोड़ की इंडस्ट्री है जिसमें लाखों बच्चे और महिलाएं शामिल हैं।वर्ष 2022 में दिल्ली सरकार के social welfare department और institute for Human Development ने एक संयुक्त रिपोर्ट निकाली जिसमें भीख मांगने के दो कारण बताए गए :–मजबूरी और पसंद।
करीब 62% लोग गरीबी के कारण,
45% लोग बेरोजगारी के कारण 15% वृद्ध ,12% आसानी से धन कमाने का साधन होने के कारण इस कार्य को करते हैं।

एक सर्वेक्षण में पता चलता है कि ये भिखारी पार्ट टाइम काम भी करते है इनमें से कुछ , कबाड़ी है, कुछ रिक्शा चालक है, कुछ मजदूरी करते हैं तो कुछ सिक्योरिटी गार्ड है, रोजाना काम न होने के कारण ये आजीविका के लिए भीख भी मांगते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 32% से कम लोग 100 रुपया दिन भर का कमाते है, 33% लोग 200 रुपया तक और 22% लोग 400 रुपया प्रतिदिन का कमाते हैं।अर्थात ये सिर्फ 6000 रुपए के आस पास ही कमा पाते हैं।

रिपोर्ट बताती है कि इन भिखारी माफिया की पहली पसंद गरीब बच्चे होते हैं जिनको ये गरीब मा बाप से खरीद लेते हैं या किराए पर मांग लेते है और इनसे भीख मंगवाते हैं।
2017 की इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में ये माफिया बच्चों को 300रुपए प्रतिदिन के दाम पर लेते थे और उन बच्चों को नशे में रखते थे जिससे वो शांत रहे और अपनी मां के लिए रोएं न।
2015 की टाइम्स ऑफ इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक गैंग जिसके सदस्य बांग्लादेशी और भारतीय दोनों थे वो 8 साल के बच्चों की ट्रैफिकिंग करते थे और उन्हें भिखारी के काम पर ट्रेन स्कूल बस स्टेशन पर लगाते थेमित्रों ये बहुत ही भयावह है ,कई हेल्पिंग ग्रुप और NGO के सदस्यों ने यहां तक कहा है कि इन भिखारी माफिया का संपर्क क्षेत्र के लोकल नेताओं से भी होता है जिसकी वजह से इनको पुलिस से सुरक्षा भी मिलती है।

कई रिपोर्ट को इससे भी दर्दनाक है , जैसा सुरेश के साथ हुआ , वैसा शायद प्रतिदिन देश में किसी न किसी के साथ होता ही होगा।सरकार को इसपर कानून बनाकर इस माफिया को शीघ्र ही रोकना चाहिए जिससे भोले भाले बच्चों और भारत के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।🙏🏻