If we want everyone to reach the finish line , We must make the starting line equal.
यह कोटा में कटौती नहीं है बल्कि इसका उपवर्गीकरण है, आइए समझते हैं कैसे,
ओबीसी रिजर्वेशन में एक शब्द है क्रीमी लेयर, क्रीमी लेयर का अर्थ है कि जिसकी वार्षिक सालाना आय 8 लाख या उससे अधिक है वो परिवार क्रीमी लेयर में गिना जाएगा और उसे आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा, तथा जिसकी आय 8 लाख से कम से उन्हें आरक्षण दिया जाएगा।इसमें समस्या यह आ रही है कि कुछ जातियां ही इस आरक्षण का लाभ उठा रही है तथा अन्य जातियों को इसका लाभ बिल्कुल भी नहीं मिल पा रहा है।आरक्षण दिया इसलिए जा रहा है जिससे जो लोग समाज में पीछे रह गए है उन्हें भी समान स्थिति में लाया जाए और यदि यह न होकर कुछ विशेष जाति को ही मात्र इसका लाभ मिलता रहेगा तो अन्य जातियां तो पिछड़ी ही रह जाएंगी |

आईए देखते है कि आरक्षण कैसे और किस परिस्थितियों में लाया और लागू किया गया तथा वर्तमान में यह कितना सफल है।मंडल आयोग की रिकमेंडेशन आई थी कि मूल संविधान में SC और ST को मात्र आरक्षण प्राप्त था। संविधान के अनुच्छेद 340 में राष्ट्रपति को यह शक्ति है कि वह SEBC को एग्जीक्यूटिव आदेश के जरिए लाभ दे सकते हैं। इसी के तहत मंडल आयोग ने जातियों के आधार पर एक वर्ग OBC का गठन किया जिसके लिए वर्ष 1993 में 27% आरक्षण दिया गया । इसमें सरकारी नौकरियों में इन जातियों को वर्ष 1993 से ही आरक्षण का लाभ दिया जाने लगा पर इसे स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी में नहीं लागू किया गया ।
> बात है वर्ष 2006 की जब तत्कालीन सरकार ने इसका विस्तार करते हुए आरक्षण को स्कूल कॉलेज IIT, IIM और यूनिवर्सिटी में भी लागू किया |

वर्ष 1993 में ही सुप्रीम कोर्ट की एक दिग्गज लॉयर इंद्रा साहनी ने आरक्षण को चैलेंज करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14A के विरुद्ध बताया। इस तथ्य पर तमाम चर्चा और गहन विचार के बाद विमर्श ये आया कि” पूरी जाति ही पिछड़ी है यह कहना पूर्णतः अनुचित है”, तथा यहां पर एक महत्वपूर्ण शब्द आया “CREAMY LAYER” अब जातियों में भी जो गरीब लोग थे उन तक ये लाभ पहुंच सके इसलिए आय को भी इसमें शामिल किया गया तथा आय की सीमा तत्कालीन समय में 1 लाख तय की गई जो आज आकर 8 लाख हो गई है।
पर समस्या यहां समाप्त नहीं हुई ,इस कानून में लूप होल बहुत सारे थे , जिस कारण एक धनवान व्यक्ति और बड़े अधिकारियों के बच्चो को भी आरक्षण का लाभ मिलता रहा तथा गरीब आज भी इस कानून से अछूते रहे।

इन सभी समस्याओं की जड़ को समझने के लिए और इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकार ने वर्ष 2017 में सरकार ने रोहिणी आयोग का गठन किया जिसको वर्ष 2013 से 2018 तक के सभी डेटा को समझने की जिम्मेदारी दी गई जिससे ये तथ्य उजागर हो सकें कि इस बात में कितना सच्चाई है।वर्ष 2013 से 2018 तक डेटा का अध्ययन करने पर जस्टिस रोहिणी की अध्यक्षता में बनी इस आयोग ने कुछ तथ्य सरकार के समाने प्रस्तुत किए जो निम्न है|
>पूरे भारत में लगभग 6000 जातियां है जो OBC की लिस्ट में शामिल है ,पर मात्र 40जातियां ऐसी है जिन्हें 50% लाभ प्राप्त होता आ रहा है।
>20% OBC जातियां ऐसी हैं जिन्हें शून्य लाभ प्राप्त हुआ है।
>अन्य 994 जातियों को मात्र 2.6% लाभ प्राप्त हुआ है
>IIT में पिछले 4 वर्ष में 13000 एडमिशन हुए जिसमें कुछ ही(5% OBC जातियों) को आरक्षण मिला
>यही हाल IIM का भी रहा है|

सरकार बदलाव लाना क्यों चाहती है
कुल मिलाकर आरक्षण का लाभ प्राप्त करना लॉटरी जीतने जैसा है जिसमें कुछ विशेष जातियों की की लॉटरी खुलेगी और उन्हीं को नौकरियां और एडमिशन मिलेगा बाकी सब सिर्फ टिकट लेकर पंक्ति में खड़े रहेंगे।आरक्षण आया सबको समान बनाने के लिए और सामाजिक न्याय दिलाने के लिए लाया गया था पर इससे कुछ विशेष जातियों बहुत अधिक समृद्ध और अन्य जातियों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है ।सरकार लेवल 10 जैसा एक लेवल बनाएगी जिसका अनुपालन सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में किया जाएगा अर्थात ऐसे किसी भी अधिकारी प्रोफेसर या प्राइवेट सैक्टर में उच्च पद पर आसीन व्यक्ति को और उस परिवार को भी आरक्षण का लाभ नहीं प्राप्त हो सकेगा
आप स्वयं विचार करें कि एक ही जाति के डॉक्टर/इंजीनियर /अधिकारी का बेटा या बेटी और एक किसान ,गरीब,मजदूर का बेटा या बेटी दोनों एक साथ एक पद के लिए आरक्षण के तहत कैसे लड़ सकते है?
सरकार चाहती है एक समानता लाना थोड़ा और सख्त नियम और कानून लाकर जिससे क्रीमी लेयर के कॉन्सेप्ट को दृढ़ता से लागू किया जा सके।
आपको बता दें कि रोहिणी आयोग ने यह सभी जानकारी और आवश्यक सुधार की आवश्यकता को वर्ष 2017 में ही सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था जिसको अब तक 9 बार टाला जा चुका है और टालने का कारण मात्र एक है राजनीतिक अस्थिरता और दबंग जातियों ,OBC में अगड़ी जातियों का विरोध। क्योंकि यह एक अति सेंसिटिव मुद्दा है जिस कारण सरकार इसे टाले जा रही थी ,पर अब शायद सरकार सभी से बात करके इसे लागू और नियम को सख्त करने की तैयारी कर रही है।
दोस्तों, यह सब आरक्षण के लिए सरकार की योजना के बारे में था, किसी भी झूठी और फर्जी खबर से गुमराह न हों।
धन्यवाद....