
नमस्कार दोस्तों,
आज हम बात करेंगे भारत, जर्मनी के संबंध और खासकर ट्रंप की लगाई टैरिफ के बाद जर्मनी के सहयोग की।
मित्रों हम हमेशा से देखते हैं कि विश्व लगभग दो भागो ने विभाजित है एक है ग्लोबल नॉर्थ मतलब विकसित देश , दूसरा है ग्लोबल साउथ जिसमें भारत विकासशील और अन्य देश हैं।
पर हम कुछ हफ्तों से खासकर अमेरिका में ट्रंप शासन के बाद से देख रहे हैं कि यूरोपियन देशों का झुकाव भारत की तरफ बढ़ा है, इसी कड़ी में जर्मनी ने भी भारत की तरफ मित्रवत सहयोग की बात कही है,

कल जर्मनी ने खुलकर भारत से सहयोग की बात की, जर्मनी के भारत में एंबेसडर ने भारत को खुलकर सहयोग और ट्रंप को विश्व पटल पर होने वाले फ्री ट्रेड का विरोधी बताया और यह भी कहा कि ड्यूटी को कम किया जाना चाहिए जिससे व्यापार बेहतर हो सके।

जर्मनी की विदेश मंत्री ने भी कुछ दिन पहले यही बात कही थी कि ट्रंप के टैरिफ किसी भी देश की मदद नहीं कर रहे , वो सिर्फ अपना हित देख रहे हैं, जर्मनी और यूरोपियन यूनियन ने कहा कि हम अमेरिका के साथ नेगोसिएशन के लिए तैयार है पर फ्री ट्रेड के साथ नहीं,
साथ ही साथ उन्होंने यह भी हाइलाइट किया कि हम कोशिश करेंगे कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हैं वो इसी वर्ष के अंत तक साइन हो जाए, और इंडो पैसिफिक सहयोग को और बेहतर बनाएंगे जैसे चीन जैसे देशों को भी बैलेंस किया जा सके ।

इस तरीके के बयानों और ट्रेड डील से हम देख रहे हैं कि यूरोपियन यूनियन और जर्मनी भारत को सहयोग के लिए आगे आ रहे है जिसमें वो अमरीका को उसकी व्यापार नीति के लिए दो टूक सुना भी रहे हैं।
आईए जानते हैं जर्मनी भारत को समर्थन दे क्यों रहा है, जर्मनी को हम जानते हैं कि वो फ्री ट्रेड का चैंपियन हैं , और जर्मनी की अर्थव्यवस्था एक्सपोर्ट पर ही निर्भर है जर्मनी Automobile, मशीनें ,केमिकल सब कुछ भारी मात्रा में निर्यात करता हैं और ऐसे में यदि निर्यात को लेकर यदि भारत जैसे देश पर टैरिफ लगेगा तो भारत से प्रभावित पूरा विश्व होगा , भारत बहुत बड़ी मार्केट है इसलिए जर्मनी का साथ आना लाज़मी है।

भारत यूरोप की इंडो पैसिफिक रणनीति का केंद्र बिंदु है यदि भारत के ऊपर कोई टैरिफ या व्यापार में कोई बाधा आती है तो यूरोप उसको अपने हित में भुनाने की कोशिश तो करेगा ही,अब भारत और यूरोपियन यूनियन के सहयोग और सुदृढ़ होंगे ऐसी ही उम्मीदें लगाई जा रही हैं|

यूरोपियन यूनियन के सभी देशों को लगता है कि भारत चीन के समक्ष विस्तृत और विशाल मार्केट है, और ये चीन का अल्टरनेटिव भी है और विशाल उपभोक्ता भी, इतना ही नहीं अमेरिका पास्ट यूरोपियन कार्स और मशीनरी को लेकर भी टैरिफ धमकी दे चुका है जिस कारण ये सभी देश अब संयुक्त रूप से आगे बढ़ेंगे और अमेरिका को आंख दिखाएंगे।
हमने कल भी देखा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ट्रंप के संपर्क करने को पूर्णतः मना कर दिया , और उन्होंने अमेरिका के प्रेशर को भी नॉर्मलाइज़ कर दिया , अमेरिका को जवाब में बताया कि हम अपने नियम अपने देश को प्राथमिकता पर रख कर बनाते हैं हम किसी भी देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करते।
भारत यूरोपियन यूनियन के साथ साथ BRICS देशों के साथ भी मजबूती से आगे बढ़ने को तैयार है।
हमारा लेख पढ़ने के लिए आपका आभार,
धन्यवाद मित्रों……