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राजीव दीक्षित जी ,मृत्यु या हत्या ?….

    राजीव दीक्षित जी , जिनकी मृत्यु वर्ष 2010 में हो गई है पर उनका नाम अक्सर चर्चा में रहता है, कौन है ,क्या विचार थे , मृत्यु हुई या फिर किसी साजिश के तहत उनकी हत्या हुई आज हम इस लेख में सभी तथ्यों पर बात करेंगे ।राजीव दीक्षित जी जिनका नाम सुनकर आपको इनके यूट्यूब पर अपलोड व्याख्यान या इंस्टा पर तैरने वाली छोटी छोटी क्लिप याद आती होंगी और आपको याद आता होगा, स्वदेशी, शिक्षा, भ्रष्टाचार से मुक्ति, अंग्रेजी उत्पादों से मुक्ति, अमेरिका का वैश्विक हस्तक्षेप.. इत्यादि काम और चर्चाएं याद आती होंगी।

    मित्रों ,

    आपने योग और आयुर्वेद से मिटेंगे रोग, आज के समय खूब सुने होंगे आप आज बड़े बड़े चेहरे जैसे बाबा रामदेव के ब्रांड पतंजलि, डाबर , हिमालया इत्यादि बड़े बड़े आयुर्वेदिक दवाओं और औषधियों की कंपनियों के बारे में सुना होगा इनसे अंग्रेजी दवाओं से दूरी और भारतीय औषधियों से प्रेम करने की बात सुनी होगी , पर क्या आप जानते हैं कि राजीव दीक्षित जी पहले ऐसे व्यक्ति थे जो देश भर में घूम घूम कर , मंच के माध्यम से बैठकों के माध्यम से प्रत्येक देश के नागरिक तक ये सभी बातें पहुंचाने वाले पहले व्यक्ति थे , वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी के समय अंग्रेजों और वर्तमान में अमेरिका को एक जी तराजू पर लाए थे |

    आज जब हमें अमेरिका टैरिफ और विश्व व्यापार की धमकी दे रहा है तो शायद हर उस व्यक्ति को राजीव दीक्षित जी याद आ रहे होंगे जिनको थोड़ा सा भी भारतीय आंदोलनों और राजनीति की समझ है , स्वदेश प्रेम का बोध है उन्हें राजीव जी हमेशा याद रहेंगे। दोस्तों सब कुछ ठीक चल रहा था , देश में तो नहीं पर राजीव जी के जीवन में तो था ही, वो अपने व्याख्यानों और संबोधनों के माध्यम से प्रतिदिन अपनी बात जनता के बीच रखते थे , देशी वस्तुओं, देशी ब्रांड का समर्थन और विदेशी वस्तुओं और ब्रांड द्वारा कैसे देश का धन लूटा जा रहा है इसको सबके समक्ष रखते थे, जनता का खूब प्यार उन्हें मिल रहा था , देश में एक क्रांति का माहौल था ,पर अचानक से एक दिन खबर आती है कि राजीव जी बीमार है और फिर अगले दिन मृत्यु..

    30 नवंबर 1967, को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ जिले में जन्म हुआ। इनके पिता श्री राधेश्याम दीक्षित और माता श्रीमती मिथिलेश कुमारी जी थी। इनकी उच्च शिक्षा इलाहाबाद से संभवतः MNIT से बीटेक और आईआईटी कानपुर से M.Tech की पढ़ाई की।मित्रों आइए राजीव जी के विचारों के बारे में जानते हैं…..
    राजीव जी राष्ट्रवादी व्यक्ति थे, और शिक्षा के बारे में उन्होंने कहा है कि भारत का मौजूदा सिस्टम पिछलग्गू है और मैकाले की शिक्षा पद्धति पर ही आज तक टिका हुआ है। वो प्राचीन काल से चली आ रही गुरुकुल व्यवस्था के हिमायती थे और उनका विचार था कि शिक्षा पद्धति को बदलना चाहिए।

    राजीव जी पहली बार सक्रिय तब हुए थे जब भारत देश में वर्ष 1984 में भोपाल गैस त्रासदी हुई। उन्होंने तब यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया था, उनका कहना था ये घटना यूनियन कार्बाइड घटना अमेरिका की सोची समझी साजिश है और इसे भारतीयों पर प्रयोग किया गया यह जांचने के लिए की इससे कितने व्यक्तियों को और कैसे मारा जा सकता है। इस त्रासदी में जो जिम्मेदार लोग थे उनको सजा दिलाने के लिए इन्होंने अनवरत आंदोलन और अनशन किया जिससे ये काफी चर्चा में रहे। इसके बाद इन्होंने देश भर के लोगों को जगाने के लिए स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की और लगभग 13000 व्याख्यान दिए।

    इन्होंने यह भी कहा कि यूनिलीवर कंपनी ने इनके द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन से ही अपना नाम बदलकर हिंदुस्तान यूनिलीवर रखा जबकि वो एक विदेशी कंपनी है, इनका मानना था कि विदेशी कंपनियां हमारे देश की औषधियों पर नमक मिर्च लगाकर हमें ही परोस रही हैं और अकूत धन विदेश ले जा रही हैं ।भारत में रामराज्य स्थापित करने के धुर समर्थक राजीव के मुताबिक भारत के मेडिकल सिस्टम को आयुर्वेद आधारित किए जाने की जरूरत है क्योंकि अंग्रेजी दवाएं शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं और पैसा भी विदेश जाता है उन्हें अनुसार विदेशी कंपनी को भारत में व्यापार का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने जब स्वदेशी आंदोलन चलाया तो उन्होंने स्वदेशी और विदेशी कंपनी के नाम के पर्चे बांटे और लोगों को जागरूक किया , कोका कोला,पेप्सी और यूनिलीवर जैसी कंपनी से लड़ाई लड़ी और शीतल पदार्थों में जहर होने की बात कही।

    आज जो बाबा रामदेव और अन्य लोग स्वदेशी सामग्री और आयुर्वेद की बात करते हैं वह सब इन्हीं की देन है, इन दोनों ने बहुत दिनों तक साथ में मंच भी साझा किया और राजीव जी के समर्थकों का दावा है कि राजीव जी की बढ़ती लोकप्रियता और जनता से मिलता अपार सम्मान बाबा रामदेव को रास नहीं आया और उन्होंने षडयंत्र के तहत 30 नवंबर 2010 को श्री राजीव दीक्षित जी की हत्या करवा दी।
    26 से 29 नवंबर को छत्तीसगढ़ में विभिन्न व्याख्यान देने के बाद उन्होंने 30 को भिलाई जाना था, भिलाई पहुंचने के बाद ही उनकी तबियत बहुत खराब हो गई और वे जब भिलाई से दुर्ग के लिए गाड़ी में बैठे तो उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें भिलाई के ही सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया हालत बिगड़ने पर उन्हें वहां से अपोलो अस्पताल में शिफ्ट किया गया जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    लोग इस बात पर और आशंकित हो जाते है क्योंकि उनकी डेड बॉडी की पोस्टमार्टम नहीं किया गया और मृत होने पर उनका शरीर नीला पड़ गया था इस कारण लोगों में ऐसा संदेह है, संदेह तब और प्रबल जाता है जब उनके मृत शरीर को वर्धा ले जाने की बजाय बाबा रामदेव के पास हरिद्वार ले जाया गया।

    खैर आज तक या उस समय पर भी न कोई पुलिस केस हुआ न कोई शिकायत हुई, जिसकी वजह से यह संदेह आज भी कायम है। कुछ बातें जो अविस्मरणीय है , राजीव जी ने मृत्यु के समय भी अंग्रेजी दवाओं के सेवन को मना किया था जो उनके स्वदेश प्रेम को प्रदर्शित करता है। राजीव जी के विचारों ने उनके प्रति कुछ लोगों में कुंठा तो भरी पर सैकड़ों लोगों को करोड़पति बना दिया और आज सब टायकून बने घूम रहे हैं।

    खैर राजीव जी और उनके विचार आज भी करोड़ों भारतीयों की रगों में बह रहे हैं। और उनके विचार जिंदा भी रहेंगे।

    इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद, हमारा समर्थन करते रहें

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