
नमस्कार दोस्तों,
मित्रों डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की बौखलाहट अब साफ नज़र आ रही है, समय के साथ साथ उनकी बयानबाजी से साफ प्रतीत हो रहा है कि वो बिल्कुल अंदाजा नहीं लगा पाए थे कि टैरिफ लगाने के बाद भारत की नजदीकियां अन्य देशों से बढ़ जाएंगी।

अमेरिका ने भरपूर कोशिश की कि भारत पर दबाव बना कर 20% के आस पास डील कर ली जाय और साथ ही स्थान रसियन तेल पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाए और अब उसी क्रम में अमेरिका ने यूरोप के देशों से भी मांग की है कि वो भारत से तेल और गैस लेना बंद करें और अमेरिका ही तरह ही भारत पर टैरिफ लगाएं ।

आपको बता दें कि अमेरिका ने भारत पर अधिकतर समानों को लेकर 50% का टैरिफ लगाया है , जिससे भारतीय बाजार पर स्वाभाविक है असर होगा, और उसी असर को कम करने के लिए भारत ने अपने अन्य सहयोगी देशों के साथ संबंध को और सुदृढ़ करना शुरू कर दिया है|
प्रधानमंत्री जी इसी कड़ी में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से,जापान के प्रधानमंत्री से, चीन के प्रधानमंत्री से मिल चुके है और हाल हो में SCO सम्मेलन को लेकर चीन दौरे पर ही है।

इन्हीं सब बातों से बौखलाकर आज ही अमेरिका में ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो ने भारत में रहने वाले ब्राह्मण पर आरोप लगाया है कि ब्राम्हण लोग अपने फायदे के लिए रूस के तेल और गैस को रिफाइन करके अन्य देशों को बेच रहे हैं।
यही कार्य आज के कई वर्ष पहले अंग्रेजों ने भारतीय समाज को तोड़ने के लिए किया था, और वही कार्य अब अमेरिका करना चाह रहा है, वो भारतीय लोगों को जाति व्यवस्था में दुबारा फंसा कर अपना हित खंगाल रहा है हालांकि भारतीय अब साक्षर है और शायद अमेरिका की ऐसी किसी चाल में न फंसे।

इन सभी कार्यों और बयानबाजी से एक बात साफ है कि अमेरिका को भारत के संबंधों और उठाए गए कदमों का बिल्कुल अंदाजा नहीं था,अमेरिका को भ्रम था कि उसके सैंक्शन के बाद भारत बिखर जाएगा और अमेरिका से ही गुहार लगायेगा पर हमने मजबूती से उनका जवाब दिया और दबाव को बिल्कुल भी हावी नहीं होने दिया।
हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद ,